यूं ही कभी
दिल के जजबात
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Tuesday, 4 March 2014
स्वप्न सुनहरे
स्वप्न सुनहरे
चमक उठे हैं
नयनों की
इस झील में
जैसे झिलमिल करते
तारे अंबर नील में
चिकने कोमल
फूल सरीखी
दमके कंचन काया
रूप अनल में
बड़ा मनोरम
अलकों वाला साया
नव कोंपल
अब वन में फूटी
फैली गंध सुगंध
कर बैठा है
प्रणय आजकल
मौसम से अनुबंध
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