यूं ही कभी
दिल के जजबात
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Tuesday, 10 November 2015
पृष्ठ अतीत की
मत खोलो
पृष्ठ अतीत की
अब भी बची है
गंध व्यतीत की
शब्द-शब्द बोले हैं
रंग-रस घोले हैं
पृष्ठ-पृष्ठ जिंदा है
पृष्ठ अतीत की
फड़फड़ा उठे पन्ने
झांकने लगे चित्र
यादों के गलियारों से
पलकें हुईं भींगी
मत खोलो
पृष्ठ अतीत की
अब भी बची है
व्यथा व्यतीत की
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