Sunday, 30 March 2014

हंसती है चांदनी

हवाओं की
करधनी पहन
हंसती है चांदनी

दूर देश
यादों के
बसती है चांदनी

बाजूबंद
   बिजली हैं    
   चाँद,चंद्रहार हैं   

आँखों में 
अश्कों के 
भरे ज्वार हैं 

रात गए
चंदा संग
चमकती है चांदनी 
  

53 comments:

  1. बहुत सुंदर है
    मनभावन है
    आपकी चाँदनी :)

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  2. Replies
    1. सादर धन्यवाद ! आशीष भाई. आभार.

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  3. बहुत सुन्दर कविता

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  4. भावपूर्ण रचना |

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  5. आपकी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
    --
    आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल सोमवार (31-03-2014) को ''बोलते शब्द'' (चर्चा मंच-1568) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!

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  6. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति,आभार।

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    Replies
    1. सादर धन्यवाद ! राजेंद्र जी. आभार.

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  7. रात गए
    चंदा संग
    चमकती है चांदनी .....

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  8. कम पंक्तियाँ हैं मगर लाजवाब हैं...बहुत खूब ..

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  9. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  10. तस्सवुरात को एक दम से नए पैरहन में प्रस्तुत किया है शब्द चातुरी एवं चयन लाज़वाब।

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  11. बहुत सुन्दर रचना आदरणीय

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  12. कमाल किया है आपने शब्दों से... !! समाँ बाँध दिया है!!

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  13. भाव और शब्द संयोजन बहुत सुन्दर लगा
    बहुत प्यारी रचना है !

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  14. आपको ये बताते हुए हार्दिक प्रसन्नता हो रही है कि आपका ब्लॉग ब्लॉग - चिठ्ठा - "सर्वश्रेष्ठ हिन्दी ब्लॉग्स और चिट्ठे" ( एलेक्सा रैंक के अनुसार / 31 मार्च, 2014 तक ) में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएँ,,, सादर .... आभार।।

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  15. सुंदर शब्दों से पिरोई हुई रचना...हार्दिक बधाई...

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  16. bahut सुन्दर और manohar rachna rajeev bhaayi badhayi ...
    bhramar5

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    Replies
    1. सादर धन्यवाद ! आ. भ्रमर जी. आभार.

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  17. वाह... उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@भूली हुई यादों

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  18. बहुत खूबसूरत, बधाई.

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  19. Wah!! Bahut hi sundar!! Abhaar!

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  20. राजीव जी बहुत खूब लिखा है जी.

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  21. हवाओं की
    करधनी पहन
    हंसती है चांदनी..... bahut sundar abhivyakti !

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  22. लाजबाब रचना ..... उम्दा अभिव्यक्ति
    बहुत दिन हो गए
    नई रचना सजनी चाहिए अब

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  23. बाजूबंद
    बिजली हैं
    चाँद,चंद्रहार हैं

    बहुत सुंदर !!

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  24. प्रिय राजीव भाई बहुत सुन्दर उपमा, श्रृंगार , मनभावन ..
    बधाई हो
    भ्रमर ५

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  25. बहुत सुन्दर है कविता नया पैरहन प्रतीकों का लिए अभिनव बिम्बों का वितान लिए

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  26. सुन्दर अप्रतिम शब्द लिए आई है कविता रानी :

    हवाओं की
    करधनी पहन
    हंसती है चांदनी

    दूर देश
    यादों के
    बसती है चांदनी

    बाजूबंद
    बिजली हैं
    चाँद,चंद्रहार हैं

    आँखों में
    अश्कों के
    भरे ज्वार हैं

    रात गए
    चंदा संग
    चमकती है चांदनी

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  27. चाँदनी के मनमोहक रूप !

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  28. हृदय.स्पर्शी प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा।

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  29. बहुत सुन्दर विम्ब लिए सुन्दर हृदयस्पर्शी रचना

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  30. सशक्त प्रस्तुति .

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  31. राजीव जी बहुत खूब लिखा है आपने ! लेकिन मैं समझ नही पा रहा , अब तक मैंने आपका ब्लॉग "देहात " ही पढ़ा है , ये नया ब्लॉग है आपका ?

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