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Friday, 11 October 2013

प्रिय प्रवासी बिसरा गया

शरद ऋतु  में हर  साल हजारों ,लाखों की  संख्या में साईबेरियाई प्रवासी पक्षी
लाखों मील की  दूरी तय कर भारत और अन्य एशियाई देशों में आते हैं .
शरद ऋतु की समाप्ति के पश्चात् क्या सभी वापस लौट पाते हैं ?
कुछ भटक जाते हैं ,तो कुछ अपनों से फिर नहीं मिल पाते .

कितने उसके संगी छूटे
कितने उसके साथी छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर इन बिछड़ों पर
कब अपना शोक मनाता है
(बच्चन जी की कविता के तर्ज पर)












फिर आ गई है बरसात                                                                        
तुम न  आए 
आती रही तुम्हारी याद  
तुम न आए 
   
   छा रही काली घटा 
   चपला चमकती 
   काश ! तुम होते यहाँ पर 
   बाजुओं में तुम्हारी आ सिमटती 

रह गया रोकर ह्रदय 
आँखें न  रोई 
बीती यादों में तुम्हारे 
न जाने कब से खोई    
   
   हुई मूक वाणी 
   दर्द गहरा गया 
   पूछती हूँ आप अपने से 
   क्या प्रिय प्रवासी बिसरा गया ?


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