Monday, 15 December 2014

यादें

नयन खुले 

खोये खोये से

कहीं यादों के 

खंडहर में 

कहीं भविष्य के 

प्रांगण में


मन का पंछी 

बस में नहीं 

उड़ता फिरता 

सपनों के 

असीमित गगन में


आधा आज

सताता है

बीते कल की 

यादों में  


आधा और

महकता है 

आने वाले 

कल के सपनों में.

18 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,आभार।

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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति

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  3. भावपूर्ण प्रस्तुति |

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  4. लाजवाब ... कल और आज के बीच में भविष्य की कल्पनाओं में ..
    यही तो जीवन भी है ...

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  5. आधा आज
    सताता है
    बीते कल की
    यादों में

    आधा और
    महकता है
    आने वाले
    कल के सपनों में.

    कल आज और कल के हर पल का दोहन करती मनहर रचना।

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  6. बहुत सुन्दर रचना

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  7. खूबसूरत अभिव्यक्ति...अपने इस ब्लॉग पर भी निरंतर लिखते रहा करें

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  8. सुन्दर अभिव्यक्ति ......

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  9. बहुत ही प्यारी रचना है! मनमोहक!!

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  10. वाह क्या बात है!

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  11. bahut badhiya
    http://puraneebastee.blogspot.in/

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  12. बहुत सुंदर। हमारा आज भी अतीत और भविष्य में बंटा होता है।

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