Tuesday, 10 November 2015

पृष्ठ अतीत की




मत खोलो  
पृष्ठ अतीत की
अब भी बची है
गंध व्यतीत की

शब्द-शब्द बोले हैं
रंग-रस घोले हैं
पृष्ठ-पृष्ठ जिंदा है
पृष्ठ अतीत की

फड़फड़ा उठे पन्ने
झांकने लगे चित्र  
यादों के गलियारों से  
पलकें हुईं भींगी
मत खोलो  
पृष्ठ अतीत की

अब भी बची है
व्यथा व्यतीत की 
    

14 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (11.11.2015) को "दीपावली विशेषांक"(चर्चा अंक-2157) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

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  2. जय मां हाटेशवरी....
    आप ने लिखा...
    कुठ लोगों ने ही पढ़ा...
    हमारा प्रयास है कि इसे सभी पढ़े...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना....
    दिनांक 11/11/2015 को रचना के महत्वपूर्ण अंश के साथ....
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की जा रही है...
    इस हलचल में आप भी सादर आमंत्रित हैं...
    टिप्पणियों के माध्यम से आप के सुझावों का स्वागत है....
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    कुलदीप ठाकुर...


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  3. बेहतरीन प्रस्तुति,

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  4. क्या बात है !.....बेहद खूबसूरत रचना....
    आप को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@आओ देखें मुहब्बत का सपना(एक प्यार भरा नगमा)

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  5. मत खोलो पृष्‍ठ अतीत की बहुत ही बेहतरीन रचना के रूप में प्रस्‍तुत हुई है।

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  6. बहुत सुंदर

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  7. मत खोलो
    पृष्ठ अतीत की

    अब भी बची है
    व्यथा व्यतीत की
    बहुत सुॆदर।

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  8. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार....

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  9. व्यथा ही सही ... पर अतीत की यादें दिल को छु जाती भी हैं ...

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