Monday, 9 December 2013

कोरे ख़त आते रहे

                                                                   
                                    
                       हमने उनकी तुलना               
चाँद से क्या कर दी
वह रात भर आईने को
सताते रहे

अनजाने ही हो गई
कुछ ऐसी गुफ्तगू
अकेले में वह
घंटों मुस्कुराते रहे

साँझ की गोद में
रवि सो गया
रात भर चाँद के
ख्वाब आते रहे

इंतजार में
तितलियों के
फूल रात भर
ओस में नहाते रहे

 उनके प्यार की
यह कैसी अदा
 हमें उनके ख़त  
कोरे आते रहे
                                                                                                                

47 comments:

  1. उनके प्यार की
    यह कैसी अदा
    हमें उनके ख़त
    कोरे आते रहे..........bahut sundar

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  2. बहुत खूबसूरत रचना ......

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  3. सुन्दर ---
    आभार आदरणीय -

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  4. खूबसूरत रचना ...

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  5. bahut hi pyaari or khoobsurat rachna .. badahai ho..
    Please Share Your Views on My News and Entertainment Website.. Thank You !

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  6. बहुत सुन्दर रचना ..

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  7. Replies
    1. सादर धन्यवाद ! आशीष भाई. आभार.

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  8. उम्दा रचना और उसमें सहेजे गए भाव

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  9. बहुत खूबसूरत रचना

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  10. http://hindibloggerscaupala.blogspot.in/ शुक्रवारीय अंक १३/१२/१३ में आपकी इस रचना को शामिल किया जा रहा हैं कृपया अवलोकन हेतु पधारे .धन्यवाद

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  11. अति सुन्दर रचना...
    बहुत खूबसूरत...
    :-)

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  12. चर्चा मंच13 December 2013 at 17:05

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (14-12-2013) "नीड़ का पंथ दिखाएँ" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1461 पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  13. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    पोस्ट का लिंक कल सुबह 5 बजे ही खुलेगा।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (15-12-13) को "नीड़ का पंथ दिखाएँ" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1462 पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  14. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (15-12-13) को "नीड़ का पंथ दिखाएँ" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1462 पर भी होगी!

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  15. मन तो कविता के भावों में बह गया --बहुत सुन्दर
    नई पोस्ट विरोध
    new post हाइगा -जानवर

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  16. बहुत सुन्दर

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  17. राग अनुराग का भाव लिए सुन्दर रचना।

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    Replies
    1. सादर धन्यवाद ! आ. वीरेन्द्र जी. आभार.

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  18. behatareen....saral shabd....gahre bhaav

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  19. नव वर्ष की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामाये
    अवश्‍य देखिये क्‍योंकि यह आपके सहयोग के बिना संभव नहीं था -
    माय बिग गाइड का सफर 2013

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