Monday, 18 November 2013

मेघ का मौसम झुका है


बादल के कोर पर 
पलकों के छोर पर 
एक आँसू सा रुका है 
मेघ का मौसम झुका है 

धानी चुनरिया है 
धरती बावरिया है 
अधरों में प्यार का 
राज यह कैसा छुपा है
मेघ का मौसम झुका है 

मेघ बरसे देह भीजे 
हम फुहारों पे रीझे 
इन्द्र के पहले धनुष का 
बाण पलकों पर रुका है 
मेघ का मौसम झुका है 
                                                      

45 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय-

    यह भी देखिये शायद -----
    बाण पलकों पर टिका है-
    / रुका है

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    1. सादर धन्यवाद ! आ. रविकर जी. आभार. आपके निर्देशानुसार संशोधन हो गया है.

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  2. बेहद सुन्दर रचना राजीव जी।

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    1. सादर धन्यवाद ! मनोज जी. आभार.

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  3. बाण पलकों पर रुका है
    मेघ का मौसम झुका है
    -----------------shandar :)

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  4. बहुत दुन्दर भाव ... आंसू की एक बूँद .. मन में तो मेघ का मौसम ले ही आती है ...

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  5. इस रचना की सभी पंक्तियाँ बेहद सुन्दर है

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  6. मेघ बरसे देह भीजे
    हम फुहारों पे रीझे
    इन्द्र के पहले धनुष का
    बाण पलकों पर रुका है
    मेघ का मौसम झुका है
    बहुत खूब रागात्मक संसार है इस रचना का। आभार आपकी टिप्पणियों का।

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  7. बहुत सुंदर रचना !!

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  8. बादल की कोर पर
    पलकों की छोर पर
    एक आँसू सा रुका है
    मेघ का मौसम झुका है
    ...वाह! अंतस को छूती बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना....

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  9. राजीव भाई , बहुत सुन्दर शब्दों से अलंकृत आपकी रचना , धन्यवाद
    नया प्रकाशन --: प्रश्न ? उत्तर -- भाग - ६
    " जै श्री हरि: "

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    1. सादर धन्यवाद ! आशीष भाई. आभार.

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  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार को (19-11-2013) मंगलवारीय चर्चामंच---१४३४ ओमप्रकाश वाल्मीकि को विनम्र श्रद्धांजलि में "मयंक का कोना" पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  11. बहुत सुन्दर रचना प्रस्तुति...

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  12. हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल{चर्चा मंच}20 November 2013 at 21:27

    इस पोस्ट की चर्चा, बृहस्पतिवार, दिनांक :- 21/11/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक - 47 पर.

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  13. बहुत सुंदर कविता.

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  14. बहुत अच्छी रचना.

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  15. khubsurat shabdon se sazi sundar rachna....

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  16. सार्थक और सुन्दर प्रस्तुति |
    आशा

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  17. मेघ बरसे देह भीजे
    हम फुहारों पे रीझे
    इन्द्र के पहले धनुष का
    बाण पलकों पर रुका है
    मेघ का मौसम झुका है
    बहुत खूब रागात्मक संसार है इस रचना का। आभार आपकी टिप्पणियों का।

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  18. बहुत सुन्दर रचना ..

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    1. सादर धन्यवाद ! नीरज जी. आभार.

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