Saturday, 11 April 2015

उन्मुक्त परिंदे


                                                                                 
कल की चिंता से मुक्त
आज के सुख में डूबे
परिंदों को नहीं परवाह
जिंदगी की कड़वाह्टों की

सूखे पत्तों को
हांक रही मंद हवा
मोहपाश में जकड़ी हुई
हलकी और भारहीन
रेशम के कपास सी
रेशा,रेशा,महीन
उड़ी जा रही
विस्तृत गगन में

सूखे दरख्तों के
अलसाये पत्ते
पीले,कत्थे,भूरे,मटमैले
रंगबिरंगे बूंदों से
बरस रहे
सिर पर
ज्यों महावर
कुछ ऐसे ही लम्हे
ज्यों यायावर ! 
                                                                                                               

23 comments:

  1. प्रकृति के चंद आनंददायक पल को महसूस कराती सुंदर कविता.

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  2. ...कुछ ऐसे ही लम्हे ज्यों यायावर !
    Lovely!

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  3. lovely lines!

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  4. हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल रविवार (12-04-2015) को "झिलमिल करतीं सूर्य रश्मियाँ.." {चर्चा - 1945} पर भी होगी!
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. कुछ ऐसे ही लम्हे
    ज्यों यायावर !
    ...बहुत सुन्दर

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  7. बहुत सुन्दर

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  8. सुन्दर व सार्थक प्रस्तुति..
    शुभकामनाएँ।

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  9. आकुल ऊड़ान में विघ्न ना डालो ,परिंदे तो यही चाहते है

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  10. बहुत सुंदर रचना।

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  11. सूखे पत्तों को
    हांक रही मंद हवा
    मोहपाश में जकड़ी हुई
    हलकी और भारहीन
    रेशम के कपास सी
    रेशा,रेशा,महीन
    उड़ी जा रही
    विस्तृत गगन में

    बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ लिखी हैं आपने आदरणीय श्री राजीव जी

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  12. कुछ ऐसे ही लम्हे
    ज्यों यायावर ...
    जिंदगी भी तो यही है ... युन्न ही गुज़र जाए तो भी सफल ...
    सुन्दर रचना ...

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  13. aajkl parinde itne vivash kahan hain....aazad ho chuke....umda abhiwyakti...

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  15. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार...

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  16. ये यायावर लम्हें जिंदगी के....

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  17. बहुत ही सुंदर रचना यही तो जीवन की सच्चाई है

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  18. आपका ब्लॉग मुझे बहुत अच्छा लगा,आपकी रचना बहुत अच्छी और यहाँ आकर मुझे एक अच्छे ब्लॉग को फॉलो करने का अवसर मिला. मैं भी ब्लॉग लिखता हूँ, और हमेशा अच्छा लिखने की कोशिश करता हूँ. कृपया मेरे ब्लॉग http://www.fly2catcher.com पर भी आये और मेरा मार्गदर्शन करें

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