Wednesday, 29 April 2015

तेरे रूप अनेक


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   इन्द्रधनुषी रंगों में रंगे
तेरे रूप अनेक
ताल,छंद,सुर हैं विविध
किंतु राग हैं एक

क्षितिज छोर तक उड़ रहा
सुरभित रम्य दुकूल
भाव भंगिमा में सदा
खिलते मधुमय फूल

हरपल रहा तुम्हारा चिंतन
कैसा मन का यह हाल
मोहपाश यह,प्रिये ! कौन सा
तुमने दिया ह्रदय पर डाल

भ्रमित हो रहा मन
चकित हुए हैं आज नयन
एक रूप बिंब अनेकों
महक रही है गुलशन-गुलशन  
                                                                                                                

19 comments:

  1. मन की बात...सलीके से अभिव्यक्त।
    इस लेखनी को नमन।

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  2. सुंदर वर्णन भावनाओं का प्रिय के लिये

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  3. बढ़िया रचना

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  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 30 - 04 - 2015 को चर्चा मंच चर्चा - 1961 { मौसम ने करवट बदली } में पर दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  5. वाह ! बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ! सार्थक सृजन !

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  6. सुंदर भावाभिव्यक्ति

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  7. बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

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  8. सुन्दर रचना !
    मेरे ब्लॉग की नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है

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  9. बहुत ही सुन्दर शब्द और उसके साथ भावनाओं का सुंदर तालमेल।

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  10. प्रेम जब आँखों में उतर आता है ... भ्रम ही भ्रम हो जाता है ...
    सुन्दर अभिव्यक्ति ...

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  11. बहुत ही अच्‍छी रचना। बधाई।

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  12. Sir, can you explain the meaning of सुरभित रम्य दुकूल....

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    Replies
    1. सुनयना जी ,सादर.
      सुरभित का अर्थ - सुवासित या सुगंधित,रम्य का अर्थ - सुंदर,दुकूल का अर्थ - रेशमी कपड़ा या चिकना और बारीक कपड़ा.

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  13. सुन्दर रचना

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  14. आह,प्रेम में स्वप्न देखते देखते मन का भ्रमित हो जाना।

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