Saturday, 26 September 2015

जुबां पर आए तो सही



        
 दिल की बात जुबां पर आए तो सही
बंद होठों के कोरों से मुस्कुराए तो सही

खामोशी से जो बात न बन पाए
थोड़ा कह कर बहुत कुछ कह जाए तो सही

जीने का उल्लास रजनीगंधा सी महक उठती हैं
मन का संताप खुद ही बह जाए तो सही

सपनों में पलाश के रंग भर उठते हैं
मुद्दत बाद जो तुमसे मिल पाए तो सही

जीने की वजह फिर बन जाए ‘राजीव’
भूला हुआ परिचय जो मिल पाए तो सही 
                                                                                                              

16 comments:

  1. बहुत खूब श्री राजीव झा जी ! शानदार अलफ़ाज़

    ReplyDelete
  2. उम्दा रचना

    ReplyDelete
  3. जीने की वजह फिर बन जाए ‘राजीव’
    भूला हुआ परिचय जो मिल पाए तो सही
    .....जीने के लिए कोई खूबसूरत बहाना जरुरी जाती हैं ....
    ...खूबसूरत ख्याल है ...

    ReplyDelete
  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (27-09-2015) को "सीहोर के सिध्द चिंतामन गणेश" (चर्चा अंक-2111) (चर्चा अंक-2109) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  5. बहुत ही अच्‍छी रचना।

    ReplyDelete

  6. जीने की वजह फिर बन जाए ‘राजीव’
    भूला हुआ परिचय जो मिल पाए तो सही ..
    जीने की वजह मिल सके तो बात ही क्या है ... बहुत लाजवाब शेर हैं इस ग़ज़ल के ...

    ReplyDelete
  7. जीने की वजह फिर बन जाए ‘राजीव’
    भूला हुआ परिचय जो मिल पाए तो सही ..

    काबिले तारीफ़ बहुत खूबसूरत ग़ज़ल.

    ReplyDelete
  8. सुन्दर शब्द रचना
    http://savanxxx.blogspot.in

    ReplyDelete
  9. आपकी इस पोस्ट की चर्चा कल 7/11/2015 को htttp://hindicharchablog.blogspot.com "हिंदी चर्चा ब्लॉग" पर की जाएगी ।
    आपका स्वागत है ।

    ReplyDelete
  10. बहुत ही सुन्दर कविता है| ऐसी कवितायेँ साहित्य की गहरी समझ के बिना नहीं लिखी जा सकती हैं| इस सुन्दर कविता के लिए आपको बहुत बहुत बधाई|

    धन्यवाद,
    अविनाश चौहान
    http://arohihindi.com/

    ReplyDelete

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...