Sunday, 27 October 2013

कोई बात कहो तुम

                                                                   
                                                                                  मध्यम मध्यम है चाँद
रौशनी गुमशुम
मध्यम हैं धड़कनें
कोई बात कहो तुम

बरसात भी है धीमी धीमी
बौछार हौले हौले
भींगा हमारा दामन
साथ भी थे तुम

भर्राए हुए लफ्ज
वक्त का ठहरना
कांपते लबों के
बोल न थे कम

छलके हुए सागर
आँखों के किनारे
पार उतर पाएँगे
क्या ख्वाब हमारे 

45 comments:

  1. Beautifully written Rajeevji!

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  2. बहुत सुंदर कविता.

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  3. बहुत खुबसूरत रचना !!

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  4. उत्तम प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय राजीव जी-

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  5. very beaitiful poem.
    your all most welcome to my blog.
    iwillrocknow.blogspot.in

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  6. खुबसूरत रचना .....

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  7. आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन शहीद जतिन नाथ दास और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  8. बहुत सुंदर ,और उम्दा अभिव्यक्ति...बधाई...

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  9. Replies
    1. सादर धन्यवाद ! हर्ष . आभार.

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  10. बहुत सुंदर !
    गुमसुम कर लें !

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    1. सादर धन्यवाद ! सुशील जी . आभार.

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  11. सुन्दर जज़्बात लिए कविता |

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    1. सादर धन्यवाद ! राकेश जी . आभार.

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  12. बहुत शानदार लिखा है , राजीव भाई
    नई पोस्ट -: प्रश्न ? उत्तर भाग - ५

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    1. सादर धन्यवाद ! आशीष भाई . आभार.

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  13. छलके हुए सागर
    आँखों के किनारे
    पार उतर पाएँगे
    क्या ख्वाब हमारे
    अभिव्यक्ति जैसे भाव में डूबा हुआ हो मन का राग ,सारी रागात्मकता ,रूप विलास। और विछोह भी।

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    1. सादर धन्यवाद ! आ. वीरेन्द्र जी . आभार.

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  14. बहुत सुंदर जजबात.

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  15. हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल{चर्चा मंच}28 October 2013 at 22:03

    इस पोस्ट की चर्चा, मंगलवार, दिनांक :-29/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -36 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....

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  16. बहुत लाजवाब ... ख्वाब जरूर पूरे होंगे ...

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    1. सादर धन्यवाद ! नासवा जी . आभार.

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  17. छलके हुए सागर
    आँखों के किनारे
    पार उतर पाएँगे
    क्या ख्वाब हमारे
    बहुत सुंदर ...

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  18. बहुत सुंदर, छलके हुए सागर आँखों के किनारे और क्या पारु उतर पायेंगे ख्वाब हमारे।

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  19. सादर धन्यवाद ! आभार .

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  20. सुन्दर भाव पूर्ण लेखन के लिए बधाई। टिप्पणियों के लिए शुक्रिया ख़ास।

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  21. सभी क्षणिकाएँ बहुत उम्दा हैं।

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    1. सादर धन्यवाद ! आ. शास्त्री जी. आभार . छंद विद्या तो नहीं मालूम, लेकिन मन में उठने वाले भावों को अभिव्यक्त करने का माध्यम ही है,इस ब्लॉग की रचनाएं.

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  22. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। आभार आपकी टिप्पणियों का।

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    Replies
    1. सादर धन्यवाद ! आ. वीरेन्द्र जी.

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