Monday, 17 February 2014

दर्द सहा नहीं जाता


दर्द तो होता है मगर सहा नहीं जाता
तू सामने भी है मगर कहा नहीं जाता

जब से दोस्ती पत्थरों से की मैंने
शीशे के मकां में मुझसे रहा नहीं जाता

जिंदगी जहर ही सही मगर पिया नहीं जाता
जीते थे पहले भी तेरे बिन अब रहा नहीं जाता

राहों में मिल गए तो समझा हमसफ़र तुझे
चल तो दिए मगर मंजिल नज़र नहीं आता

सुकूं की तलाश में कहाँ कहाँ ढूँढा तुझे
बेताब मेरा दिल मगर वहां नहीं जाता

तू आ के थाम ले मेरे हाथों को
दर्दे दिल का मगर सहा नहीं जाता

ले चल मुझे ख्वाबों के उस गाँव
जुदाई का साया जहाँ नहीं जाता 
    

Monday, 10 February 2014

फागुन की धूप


आँगन में पसरी है 
फागुन की धूप
मौसम की महक हुई 
कितनी अनूप 

बिंब लगे बनने

कितने रंगों में 
उतरने लगी उमंग 
तन के अंगों में 

भर उठे आशा से 

मन के सब कूप 

बस गया यौवन 

पेड़ों की शाखों पर 
उतरा है पराग मस्त   
फूलों की शाखों पर 

आँखों में थिरकते

सपनों के सूप 

कांपते लबों पर 

मीठे संबोधन 
दौड़ गई नसनस में 
मीठी सिहरन 

चेहरे पर उतरा है 

सोने सा रूप  


Monday, 20 January 2014

पलाश के फूल

खिल गए 
पलाश के फूल
मंगल कुमकुम
कलश मधुरस

धूल धूसरित तन

मटमैला रंग
पास सड़कों से
दूर वनों तक
खिल उठा पलाश


वर्ष भर विस्मृत
रहता अनजान
पर अकस्मात्
सुन पीहू पुकार


मालकौंश राग
चटकदार पुष्प
लिए सूर्ख  
सिंदूरी लाल 

Monday, 9 December 2013

कोरे ख़त आते रहे

                                                                   
                                    
                       हमने उनकी तुलना               
चाँद से क्या कर दी
वह रात भर आईने को
सताते रहे

अनजाने ही हो गई
कुछ ऐसी गुफ्तगू
अकेले में वह
घंटों मुस्कुराते रहे

साँझ की गोद में
रवि सो गया
रात भर चाँद के
ख्वाब आते रहे

इंतजार में
तितलियों के
फूल रात भर
ओस में नहाते रहे

 उनके स्नेह की
यह कैसी अदा
 हमें उनके ख़त  
कोरे आते रहे
                                                                                                                

Monday, 18 November 2013

मेघ का मौसम झुका है


बादल के कोर पर 
पलकों के छोर पर 
एक आँसू सा रुका है 
मेघ का मौसम झुका है 

धानी चुनरिया है 
धरती बावरिया है 
अधरों में नेह का 
राज यह कैसा छुपा है
मेघ का मौसम झुका है 

मेघ बरसे देह भीजे 
हम फुहारों पे रीझे 
इन्द्र के पहले धनुष का 
बाण पलकों पर रुका है 
मेघ का मौसम झुका है 
                                                      
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